बरेली – रामपुर स्थानीय निकाय क्षेत्र एमएलसी चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी है। इनमें बरेली नगर निगम के पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा  इन दिनों चर्चा में हैं। मम्मा का राजनीतिक सफर काफी लंबा है और कभी भी नगर निगम का कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं। मम्मा और उनकी पत्नी वर्ष 1989 से लगातार पार्षद बनते आ रहे हैं।  वे बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य भी हैं। भाजपा पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने अपनी जिंदगी का लगभग साढ़े तीन दशक से भी अधिक समय राजनीति और समाजसेवा को समर्पित कर दिया। वह नगर महापालिका के समय भी सभासद रहे और आज भी पार्षद हैं। साथी राजनेता बताते हैं कि मम्मा जमीन से जुड़े नेता हैं और अगर पार्टी ने उन्हें मौका दिया होता  वह अब तक विधायक भी बन चुके होते ।

व्यापारी संगठनों से लेकर समाजसेवी संगठनों तक शायद ही ऐसा कोई प्रतिष्ठित संगठन होगा जिसके पदाधिकारी के रूप में मम्मा ने सेवाएं न दी हों। अगर भाजपा उन्हें एमएलसी टिकट देती है तो यह बरेली के लिए एक नया इतिहास बन जाएगा क्योंकि आज तक बरेली का कोई भी पार्षद कभी भी भाजपा से एमएलसी का चुनाव नहीं लड़ सका है। संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश भी जाएगा कि देर से ही सही मगर पार्टी में एक आम समर्पित कार्यकर्ता को भी ऊंचा मुकाम हासिल हो सकता है। मम्मा पिछले लगभग दो साल से एमएलसी चुनाव को लेकर तैयारियां कर रहे हैं। बरेली और रामपुर जिले का शायद ही ऐसा कोई जन प्रतिनिधि होगा जिसके दरवाजे पर मम्मा ने दस्तक न दी हो। फिर चाहे वह विरोधी दलों के जन प्रतिनिधि ही क्यों न हो यह मम्मा का व्यक्तित्व ही है कि वह विरोधी दलों के नेताओं के भी प्रिय हैं। मम्मा ने अपनी पूरी जिंदगी राजनीति को समर्पित कर दी है।

उनके जैसे कर्मठ और जनता के बीच के नेता को अगर एमएलसी का टिकट मिलता है तो यह भाजपा के इतिहास में सुनहरे अध्याय के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा। क्योंकि आम जनता उनमें अपना अक्स देखती है। वह चाहती है कि उन्हें वीवीआईपी नहीं उनके बीच का एमएलसी मिले। 

संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी।

By Anurag

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *