2022 के विधानसभा चुनाव को समाजवादी पार्टी बहुत गम्भीरता से ले रही है और एक एक कदम फूँक फूँक कर रख रही है
सपा प्रत्याशीयो की लिस्ट जारी न होने के 2 प्रमुख कारण दिखाई दे रहे है एक तो सपा ने जिन छोटे दलों से समझौता किया है वो दल
अपनी मनमाफिक सीट चाहते है बरेली की 2 सीट ऐसी है जिनपे सबसे अधिक परेशानी है एक है बिथरी चैनपुर जिस पर प्रसपा ने
दावा ठोक रखा है दूसरी है बहेड़ी जिसे महान दल और लोकदल दोनों अपने पाले में करना चाहते है जबकि बहेड़ी सीट पर पहिले से ही
सपा के 2 प्रत्याशी दिन रात प्रचार में जुटे है
दूसरी सबसे बड़ी परेशानी ये है हर सीट 10 से 15 प्रत्याशी आवेदन कर चुके है और भाजपा ,सपा और कांग्रेस के भी काफी लोग टिकट
की आस में समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके है अब इन्हे कैसे एडजस्ट किया जाए क्यूंकि पार्टी में सालो से मेहनत कर रहे व्यक्ति की

जगह दुसरे दल से आये नेता की टिकट दिया तो भारी मुसीबत हो सकती है पिछले दिनों एक विधानसभा में ये देखने को भी मिल रहा था जब
दुसरे दल से आये नेता का खुलकर विरोध प्रारम्भ हो चुका है एक चाल सपा ये भी देखना चाहती है की भाजपा और कांग्रेस ने क्या गोटी
फिट की है जिससे उसी के हिसाब से रणनीति बनाकर प्रत्याशी उतारे जाए लेकिन एक बात सपा के गले की और फांस बनती जा रही है
सभी वर्गों और समाज को प्रतिनिधित्व देना जिससे ब्राह्मण ,ठाकुर ,वैश्य और पिछड़ा वर्ग अपने लिए प्रतिनिधित्व की मांग उठाकर
मनमाफिक सीट मांग रहे है अब सपा के प्रत्याशी लिस्ट आने का इंतज़ार करते करते बात करते नज़र आते है की कुछ ही समय बचा है
और कोरोना काल में प्रचार भी डिजिटल होना है ऐसे में सपा और कांग्रेस कही बाजी न मार ले अब देखना होगा सपा क्या नए तरीके से
अपने कैंडिडेट्स को टिकट देती है और किस तरह से प्रचार करती है

By Anurag

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