2022 के नवंबर महीने में नगर निगम के चुनाव प्रस्तावित है विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा में सीधा मुकाबला हुआ जिसमें बीजेपी की एकतरफा जीत हुई और सपा के हिस्से केवल 125 सीट आयी अधिकतर सीटों सपा प्रत्याशी को मुस्लिमो ने एकतरफा समर्थन दिया फिर भी सपा हर सीट हारती चली गयी

बात बरेली नगर निगम की करे तो 2006 से 2012 तक मेयर की सीट कांग्रेस के कब्जे में रही बाद में कांग्रेस का एक सांसद भी बरेली से जीता 2012 में अमजद सलीम को कांग्रेस ने उतारा जो चुनाव में अपनी जमानत भी ना बचा सके 2017 में अजय शुक्ला को कांग्रेस ने टिकट दिया मगर चुनाव के पहिले योगी आदित्यनाथ की बरेली कॉलेज की सभा ने सभी के समीकरण बिगाड़ दिये और अजय शुक्ला की भी करारी हार हुई उन्हें कुल 21295 वोट मिले 

अब 2022 में कांग्रेस के संभावित चेहरे कौन है आइये एक नज़र डालें

पहला नाम महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला का ही आता है जो पिछले हार का बदला लेना चाहते है अगर मुस्लिमो ने इस चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया तो मुस्लिम ब्राह्मण समीकरण से बीजेपी की नाव डूबनी तय है ऊपर से अजय शुक्ला की व्यापारियों में बड़ी पकड़ है जो उन्हें खुलकर समर्थन दे सकते है अजय शुक्ला का परिवार खांटी कांग्रेसी रहा है। उनके पिता पंडित रामस्वरूप शुक्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह कई बरसों से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी रहे। अजय शुक्ला ने अपना राजनीतिक कैरियर एनएसयूआई से शुरू किया। वह युवक कांग्रेस में भी रहे। बरेली और रुद्रपुर में उद्योग चला रहे अजय शुक्ला कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हैं। वह गैर सरकारी संस्था भारत सेवक समाज के भी प्रदेश महामंत्री हैं। मगर उनके साथ एक कमजोरी है उनके गुट का कमजोर होना पिछले दिनों जो मारपीट हुई थी उससे उनके साथ के कार्यकर्ताओं में आक्रोश है कि उनके साथ अन्याय हुआ

दूसरा नाम कांग्रेस के ही दूसरे ब्राह्मण प्रदेश प्रवक्ता डॉ कुलभूषण त्रिपाठी है जिन्हें इकॉनमी से लेकर इतिहास तक का पूरा ज्ञान है  अक्सर बड़े मुद्दों पे त्रिपाठी बड़े धुरंधरों को चुप कर देते है उनकी पत्नी बरेली कॉलेज में उर्दू विभाग की प्रवक्ता है उनके साथ भी हिन्दू मुस्लिम दोनों तबकों का वोट जुड़ा है लेकिन उनके साथ एक बड़ी दिक्कत ये हो सकती है जमीनी राजनीति की कमी जिसमे वो मात खा सकते है

तीसरा नाम जिला प्रवक्ता राज शर्मा का आता है जो अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते है और किसी भी पार्टी या नेता पे सीधा हमला करने से कभी नही चूकते सेना से रिटायर होकर राजनती में आये राज शर्मा का सूत्रों के अनुसार मेयर का चुनाव लड़ने का पूरा प्लान है अगर मेयर सीट महिला भी होती है तो राज शर्मा ने प्लान बी में अपनी पत्नी का विकल्प तैयार कर रखा है उनकी ताकत ही उनकी कमजोरी है सीधा बोलने के कारण उनकी पार्टी में ही उनके बहुत दुश्मन हो चुके है

चौथा नाम आता है मुस्लिम कैंडिडेट के रूप में महिला नाहिद सुल्ताना  का जोकि कन्या इंटर कॉलेज से प्रिंसिपल से रिटायर है और विधानसभा में भी आवेदन कर चुकी है मगर टिकट नही मिला अगर कांग्रेस किसी मुस्लिम पे दांव खेलती है तो उनका टिकट पक्का है और वो दमदार तरीके से लडेगी ये भी पक्का है उनके साथ दिक्कत ये हो सकती है कि मुस्लिमो के अलावा और दूसरे वोट कैसे जुटाए जाये

वैसे डबल इंजन की सरकार में बीजेपी को हराना कठिन है लेकिन कांग्रेस इसे अपना अंतिम मौका मानकर अगर लड़ाई लड़ी तो जीत पक्की है बाकी एक पॉइंट इस पर भी निर्भर करेगा कि सपा से उम्मीदवार कौन होगा सबसे बड़ी बात अगर अंतिम समय मे बाहर से प्रत्याशी आया तो कांग्रेस अपनी दुर्गति बचा नही पाएगी

By Anurag

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