दिनेश पवन का जाना उनके शुभचिंतकों के लिए तो दुखदाई है ही मेरे लिए इस नवीन सक्सेना की दुखद सूचना ने तो स्तब्ध कर दिया जिसकी सायंकाल उनकी बहन ने पुष्टि की। सोमबार को उनके घर लर ही भेंट हुई थी कह रहे थे कल दिल्ली जाना है। लौट  कर तुम्हारे साथ हॉस्पिटल भी चलना है । नींद कम आ रही है।  दिल्ली में अब पवन जी ऐसी नींद में गए जहां जगाना अलका भाभी, पुत्र राघव या  किसी को भी उनको जगाना संभव नहीं है। बीते 40 वर्ष के लंबे परिचय में लगभग 20 वर्ष हम लोगो ने दैनिक जागरण में दिन रात एक किया। कहीं जाना हो या डेस्क पर काम हो मिलकर ही सारी समस्या का निस्तारण करते थे।

सरल स्वभाव,  समय और अपने कार्य के पाबंद,  जिद के पक्के, जो नहीं करना वह नहीं करना,। संपर्क सूत्र इतने मजबूत की अपनी बीट की हर खबर पर उनकी पैनी नजर रहती थी। धार्मिक खबरों के लेखन में  उनका सानी नहीं था। यही नहीं ज्योतिष के बारे में उनकी बात के लोग कायल थे। कुंडली दिखाने एवम समस्या निदान को लोग उनके घर पर इंतजार करते थे। कार्यालय की भागमभाग से भी वह ज्योतिष के उत्तर देने को समय निकाल लेते थे। मित्रता धर्म निभाने में भी पीछे नही थे। पत्रकार संगठन के कई कार्यक्रम में वह मेरे साथ ओंकारेश्वर, मानेसर, इलाहाबाद, दिल्ली, आगरा, आदि  कई जगह जाना हुआ। दिनेश जी और हमने परिवार के साथ बाबा महाकाल के भी दर्शन किए। बरेली में होने वाले राजनीतिक, धार्मिक, कल्चरल आदि के अधिकांश कार्यक्रमो में साथ ही रहते थे। एक ही स्कूटर पर चलकर हम लोग देर रात विवाह आदि में भी विलंब से ही शामिल हो पाते थे। सभी दुख दर्द में उनका कहना था कि सब ठीक ही होगा। प्रभु से प्रार्थना है दिनेश पवन जी को अपने चरणों मे स्थान दें।

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