बरेली कॉलेज में विद्यार्थी परिषद के सुरेश चंद्र शर्मा लगातार 3 बार छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। उनको श्रीमती इंदिरा गांधी, फ्रंटियर गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान सहित नेता स्नेह देते थे। सादा जीवन जीने वाले सुरेश को उनके करीबी एक राजकुमार ही मानते थे।

वैसे सुरेश चन्द्र शर्मा का जन्म 4 नवम्बर 1949 को ग्राम नरहरपुर पोस्ट बाजिदपुर जिला अलीगढ़ में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अलीगढ़ में की। बाद मे बरेली में आकर बरेली कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त की । यहाँ तक कि अपने स्कूल और कॉलेज की टीमों की उन्होंने कप्तानी भी की।

सुरेश शर्मा ने 1969-70, 1970-71और 1971-72 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से बरेली कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष पद  पर रहकर एक हैट्रिक का प्रदर्शन किया। वह ‘राष्ट्रीय एकता परिषद और ‘युवा संघ ‘ के राष्ट्रीय सचिव थे। और बरेली मण्डल के ‘तरुण शान्ति सेना’ और ‘शिक्षा में क्रांति अभियान ‘ के संयोजक भी थे। स्वर्गीय सुरेश चन्द्र शर्मा ने बरेली कॉलेज के अपने कार्यकाल में तमाम विभूतियों जैसे फ्रंटियर गाँधी खान अब्दुल गफ्फार खाँ, श्रीमती इन्दिरा गांधी, श्री वी. वी. गिरि, गोपाल स्वरूप पाठक, बाबू जगजीवन राम,  एच. एन. बहुगुणा, पं. कमलापति त्रिपाठी, एन.डी. तिवारी, डा. स्वरूप सिंह ,श्री जैनेन्द्र जैन और श्री मदन दास देवी (आर. एस.एस.)  आदि दिग्गजों को आमंत्रित करके और उनकी मेजबानी करके उन्हें सम्मान प्रदान किया । वह श्री अटल बिहारी बाजपेई जी द्वारा पसंद किए जाने वाले देश के चुनिंदा छात्र नेताओं में से एक थे ।

 सुरेश ने तलत महमूद, किशोर कुमार, सुलक्षणा पण्डित, वान शिपले, महेश कुमार व राजकुमार आदि को आमंत्रित कर बरेली कॉलेज छात्रों और नगरवासियों का मनोरंजन कराया व इन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए व्यवस्था की।

श्री सुरेश चन्द्र शर्मा ने 4 दिसम्बर 1973 को श्रीमती ऊषा शर्मा के साथ दाम्पत्य जीवन में प्रवेश किया । सर्वशक्तिमान ईश्वर ने उन्हें दो बेटियों कुमारी अन्जलि व कुमारी निधि एवं एक बेटा साकेत सुधांशु शर्मा का आशीर्वाद दिया। जो अब शिक्षा पूर्ण कर अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहे है।

अपने सर्विस करियर में उन्हें पहली बार भारतीय स्टेट बैंक, बरेली में प्रबंधक पद पर नियुक्त किया गया था। तत्पश्चात उन्होंने पीलीभीत में  सेवा की। वह बैंक यूनियन के प्रतिनिधि एवं सी. सी. एम. भी थे। उन्होंने 1974 में आबकारी अधिकारी की नौकरी लेने के लिए बैंक के पद से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने  1975 से 1978 तक जिला रामपुर में कार्यभार सम्भाला तथा वे बरेली सर्कल में 1978 से 1979 तक रहे | 1979 से मई 1980 तक कासगंज जिला एटा मे रहे ।

4 मई 1980 सुरेश शर्मा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण दिन साबित हुआ। दिल्ली से कासगंज लौटते समय सुरेश स्वयं जीप चला रहे थे कि बुलन्दशहर के पास मौत के क्रूर हाथों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस मार्ग दुर्घटना में काल ने सुरेश शर्मा को हमेशा को छीन लिया। सुरेश सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत थे और सभी लोग सुरेश से अत्यन्त प्रेम करते थे।

उन्होंने अपने जीवन के हर पल को सबसे गतिशील, महत्वपूर्ण और समर्पित तरीके से व्यतीत किया । यह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यदि यह कहा जाये कि सुरेश चन्द्र शर्मा न केवल रेत पर अमर पद चिन्ह छोड़ने में सक्षम थे बल्कि चट्टानों पर भी उन्होंने पद चिन्ह छोड़े |

स्वर्गीय सुरेश चंद शर्मा की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई प्रेम प्रकाश शर्मा ने उनकी यादों को अमर बनाने के लिए बरेली में सुरेश शर्मा नगर कॉलोनी, श्री सुरेश शर्मा स्मारक  विद्यापीठ इंटर कॉलेज, श्री सुरेश शर्मा स्मारक विद्यापीठ पब्लिक स्कूल, सुरेश शर्मा पुस्तकालय,  सुरेश शर्मा स्मारक, सुरेश शर्मा तरुण मंच, सुरेश शर्मा संगीतांजलि,  सुरेश ज्योति परिषद आदि तमाम सामाजिक संस्थाओं इत्यादि की स्थापना भी की । जिसे अब उनके पुत्र एडवोकेट साकेत सुधांशु शर्मा देख रहे हैं। जो  भाजपा के अलावा रोटरी क्लब के साथ समाज सेवा भी करते हैं।।                           

 निर्भय सक्सेना, पत्रकार       

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