बरेली। बीजेपी की उत्तर प्रदेश सहित 4 राज्यो के विधान सभा चुनाव में विजय के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की पुना वापसी हो गई है। वर्ष 2021-2022 का वित्त वर्ष देश मे अब कोविड वेक्सिनेशन के लगभग 188 करोड़ डोज देने के लिए जाना ही जायेगा जिससे लोगो को एक स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र मिला। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो पूर्वांचल में तो विकास का डंका बजा पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गंगा एक्सप्रेस वे का शाहजहांपुर में मोदी जी द्वारा शिलान्यास भी हुआ। अगर बरेली की बात की जाए तो अपने जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के त्रिशूल एयरपोर्ट पर कई बार चेंज ओवर तो हुए पर कोई नई योजना की घोषणा इस वर्ष में नहीँ हो सकी। अलवत्ता इस वर्ष हवाई मानचित्र पर बरेली का नाम जरूर आया और बरेली के आसपास के लोगो को एयर कनेक्टिविटी भी मिली। अटल सेतु, सेटेलाइट, इज्जतनगर का उपरिगामी पुल भी शुरू हुआ। वर्ष 2021 में बरेली को पुरानी मांग के अनुरूप अब तक बरेली को न तो एम्स, कृषि विश्वविद्यालय या दक्षिण के लिए सीधी रेल सेवा मिली। और न ही लाल फाटक पुल, चौपला को बदायूं रोड से जोड़ने वाले पुल का, रामगंगा पर बांध का अधूरा कार्य हो या कोविड हॉस्पिटल में विशेष उपचार की सुविधाएं देने, कर्मचारी राज्य बीमा निगम का 100 विस्तर वाला हॉस्पिटल का समय सीमा में कार्य ही पूरा तो क्या 50% भी पूरा नही हो सका। हुलासनगरा भी पूरे साल जाम के लिए चर्चित रहा। कुदेशिया फाटक पर अंडर पास भी अधूरा, सी बी गंज में प्रस्तावित आई टी पार्क, अर्बन हॉट, उपरिगामी वाई शेप कुतुबखाना, सुभाषनगर, डेलापीर का उपरिगामी पुल पर भी केवल फाइल पर आश्वासन ही मिलते रहे। अब जब पुना प्रदेश में योगी सरकार आ गई है स्मार्ट सिटी बरेली में सड़के सीवर पाइप लाइन डालने के लिए हर तरफ खोदी गई। पर कार्य अभी भी अधूरा ही रहा। जिला जेल की भूमि पर एम्स, कूड़ा निस्तारण के लिए भी बाकरगंज में प्लांट शुरू होने का दावा किया गया। बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने को कॉलेज कर्मियों का आंदोलन भी निरंतर चलता रहा। बीते दिनों राजेश जी को बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, छत्रपाल को प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री पदः का झुनझुना ही मिला। 2022 के इस चुनाव में छत्र पाल हर गए। राजेश अग्रवाल को टिकट नहीं मिला उनकी जगह संजीव अग्रवाल कैंट विधायक बने। भीतरघात की आशंकाओं के बाद भी डॉ राघवेंद्र ने बिथरी चैनपुर सीट को जीता। बरेली के पड़ोसी जिलों के कुछ राजनेता अपने बरेली के समर्थकों के कंधे पर अपनी बंदूक चलाने को बरेली की खाली पिच पर अपनी राजनीति की बेटिंग करते रहे। कभी चुनाव नही लड़े बदायूं के बी एल वर्मा भी केंद्रीय मंत्री मंडल में स्थान पाने में सफल रहे। पर उनके दम पर कितना लाभ बीजेपी को आगामी चुनाव में मिलेगा यह समय ही बताएगा। बरेली में पार्षद सतीश कातिब, गौरव सक्सेना, शालिनी जौहरी आदि के प्रयास से निर्भय सक्सेना की प्रेरणा पर चित्रगुप्त चोक पर कलम दवात की प्रतिमा भी लगी। कायस्थ समागम एवम चित्रगुप्त चौक लोकार्पण को लेकर भी चर्चा का दौर चला। अर्बन बैंक में संतोष गंगवार जी ने दीन दयाल उपाध्याय जी की मूर्ति लगवाई। बरेली में भाजपा के नीव के पत्थर रहे ठाकुर राजवीर सिंह, विधायक केसर सिंह, पूर्व विधायक बीरेंद्र सिंह, के अलावा पत्रकार आशीष अग्रवाल, प्रशांत सुमन, दिनेश पवन, रामा बल्लभ शर्मा, सुश्री नूतन सक्सेना ने भी दुनिया को अलविदा कहा। राजनेताओं ने होने वाले चुनाव के लिए अपनी कमर कस ली है। साल के अंतिम दिन शहर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की नगर के अंदर हुई विश्वास यात्रा को यादगार बना गया। पूरा शहर बीजेपी विधायक टिकट के दावेदारों के बेनर होर्डिंग से कुछ दिन पूर्व ही पट गया था। कथित दावेदारों ने समाचार पत्रों में पूरे पेज के विज्ञापन पर भी खूब पैसा बहाया। कोविड ओमोक्रोंन की परवाह अब किसी को भी नही दिखी । बीजेपी में जहां हर दल के लोग शामिल हुए जिसमे पूर्व सांसद सर्वराज सिंह के पुत्र भी शामिल है। पत्रकार पवन सक्सेना एक बड़ा जोखिम उठाकर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। 15 साल बाद जिला बार एसोसिएशन में इस बार अध्यक्ष रहे घनश्याम शर्मा ने चुनाव नहीं लड़कर अरविंद कुमार को बार अध्यक्ष बनबाने में सफलता पाई। अनिल द्विर्वेदी इस बार भी सफलता से दूर ही रहे। बरेली के निवासी रहे तथा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट रवि रायजादा को उत्तर प्रदेश सरकार का महाधिवक्ता बनाया गया। मानव सेवा क्लब अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा, अभय भटनागर, एन एल शर्मा, वेद प्रकाश कातिब, राजेन विद्यार्थी, निर्भय सक्सेना, इंदर देव त्रिवेदी आदि क्लब के सदस्यों के साथ समाजसेवा के कार्य मे लगा रहा। एक दैनिक अखबार ने कई वर्ष बाद सफल मुशायरा भी कराया था। कुल मिलाकर बरेली में हुए विकास के अधूरे दावे 2022 के विधान सभा चुनाव में मुखयमंत्री की पुना वापसी के बाद अब जमीन पर कब उतरेंगे। जनता ने तो बीजेपी पर भरोसा किया है। यह आने वाला वित्तीय वर्ष का समय ही बतायेगा कि अधिकारियों की अदूरदर्शिता वाले निर्णय से जनता का कितना भला होगा। स्मार्ट सिटी में अभी तक कुतुबखाना सब्जीमंडी, किला, श्यामगंज, कचहरी, तहसील रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में वाहन पार्किंग तक का चिन्हीकरण नहीं हुआ है।

निर्भय सक्सेना, पत्रकार

By Anurag

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *