बरेली में आजादी के बाद दिल्ली, लखनऊ एवम अन्य शहरों से ही दैनिक पत्रों के बरेली में प्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय स्तर पर प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक पत्रों के पत्रकारों का ही बोलबाला था। जिनका लेखन भी सीमित दायरे या अपनी विचारधारा को बढ़ाने तक ही होता था। वर्ष 1960 के दशक में आगरा से आए दैनिक अमर उजाला का बरेली से प्रकाशन के बाद ही बरेली में पेशेवर पत्रकारिता की वास्तविक शुरुआत हुई। जिसमे मुंशी प्रेम नारायण, ज्ञानसागर वर्मा, वी के सुभाष, जे बी सुमन, राकेश कोहरवाल, सुधीर सक्सेना, हरी शंकर, वी के सुभाष आदि अग्रणी पेशेवर पत्रकार थे। बरेली में भी वर्ष 1995 में दूरदर्शन के बाद कई न्यूज चैनल आने के बाद पत्रकारिता की दिशा भी बदल गई। बाद में बरेली भी देश के प्रमुख समाचार पत्रों का प्रकाशन केंद्र बन गया। जिससे बरेली में पत्रकार भी पूर्णकालिक हो गए। बाहर से आए पत्रकारों ने बरेली में प्रशिक्षण लेकर देश भर में अपना नाम कमाया। वर्ष 1970 =1980 के दशक में पोस्ट ऑफिस में डाक या तार से समाचार भेजे जाते थे। दैनिक समाचार पत्रों के रोडवेज बस से भी समाचार पैकेट आते थे। आजकल अब हाल यह है की कुछ ही मिनट में कंप्यूटर या मोबाइल से अपनी एजेंसी या पोर्टल पर भेजा समाचार फोटो देश भर में वायरल हो जाता है। बरेली में पत्रकारिता जगत में 1974 के दशक में जब मैं पत्रकारिता क्षेत्र में कुछ सीखने की ललक से आया उस समय बरेली में बाहर के आने बाले देश-प्रदेश के समाचार पत्रों में समाचार भेजने वालों में मुंशी प्रेम नारायण सक्सेना, नरेन्द्र मोहन मुखर्जी, धर्मपाल गुप्ता, बी आर मिगलानी, के के गुप्ता, सुरेश शर्मा एवम साप्ताहिक समाचार पत्रों में तेज बहादुर सिन्हा, ब्रज पाल बिसारिया, जे बी सुमन, के के शर्मा, जगन्नाथ साहनी, सरस्वती सहाय त्यागी, पी सी आजाद, ए के जोहर शास्त्री, के के गौड़, नफीस भारती, पटेल आदि की गूंज होती थी जबकि बरेली के समाचार पत्रों में स्वर्गीय नरेश वर्मा, के. के. शर्मा, बलवीर त्यागी जी, बलवंत राय मिगलानी के नाम की चर्चा होती थी जिनके रोज ही समाचार तार से या समाचार पैकेट के रूप में दिल्ली जाते थे। बरेली में अक्सर श्रमजीवी पत्रकार जे.बी.सुमन, राकेश कोहरवाल के साथ रहकर उनके कुछ सीखने का प्रयास करता था। उसी दौरान जे. बी. सुमन ने एक दिन मुंशी प्रेम नारायण सक्सेना से मेरी भेंट कराई थी यह कहकर की यह लड़का अभी पत्रकारिता के क्षेत्र में नया है। आप भी इसे समाचारों के बारे में जानकारी देते रहा करें ताकि ये अपनी ‘दैनिक विश्व मानव’ की रिपोर्टिंग में कुछ काम कर सके। मुंशी प्रेम नारायण जी से भेंट के बाद उनसे कचहरी पर बंगलिया चैंबर में उनसे मुलाकात होती रही। जहां आम की बंगगिया स्थित बिस्तर पर कई वकील कुर्सी डाल कर बैठते थे और गपशप में मुंशी प्रेम नारायण जी उन्हें शहर के किस्से चटकारे लेकर सुनाते थे। जब मैं पहुंचता तो वह नमस्कार करने के बाद कहते थे बैठ जाओ और कुछ समय बाद वह बंगलिया में बसंत चाय वाले की दुकान पर ले जाकर दिन भर की सुनी सुनायी घटनाओं के बारे में बताते थे और कहते थे कि तुम फलां-फलां व्यक्ति से इस बारे में मिल लेना। इस संबंध में तुम्हें और भी काफी जानकारी मिल जायेगी ताकि तुम्हारा समाचार ढंग से बन सके। इसके बाद वह एक चाय एक समोसा खिलाकर मुझे विदा करते थे। मैं अपने कार्यों में लगकर अगले दिन प्रकाशित समाचार उन्हें अवश्य दिखाता था और वह मेरी हौसला आफजाई करते थे। मुंशी प्रेम नारायण जी के साथ कई बार चुनाव की कवरेज के लिए भी सूचना विभाग की जीप में पीछे बैठकर जाने का सौभाग्य मिला। होता यह था की सूचना विभाग बरेली की जीप कहीं जाने के लिए नरेन्द्र मोहन मुखर्जी के घर जाती थी और उसके बाद कोतवाली पर एकत्रित पत्रकारों को लेने पहुंचती थी। जिसके कारण नरेन्द्र मोहन मुखर्जी के चौपुला मनोरंजन केन्द्र रोड स्थित घर पर जाती थी और सूचना अधिकारी आगे की सीट पर काबिज हो जाते थे। मुंशी प्रेम नारायण हम जैसे हम पत्रकारों को पीछे की सीट पर बैठना पड़ता था। यात्रा के दौरान अक्सर कोई न कोई प्रसंग चटकारे लेकर सुनाते थे जिससे वहां हास्य का वातावरण गुंजायेमान रहता था। एक बार की बात है मोहर्रम के समय हम सभी पत्रकार क्षेत्राधिकरी नगर पुलिस के कार्यालय में क्षोत्राधिकारी डा. एच. सी. फुलेरिया से बैठे चर्चा कर रहे थे। इसी बीच नरेन्द्र मोहन मुखर्जी का वहां आना हुआ और क्षेत्राधिकारी पुलिस फुलेरिया जी को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे काम का क्या हुआ? जिस पर फुलेरिया जी ने उत्तर दिया मोहर्रम बाद आपका काम हो जायेगा। जिसपर मुखर्जी ने कहा ‘व्हाट इस मोहर्रम’? इसके बाद मुंशी जी ने अपनी हाजिर जवाबी से कहा मुखर्जी साहब मैं मौहर्रम तो नहीं बस मौहर्रमी शक्ल के बारे में अभी आपको अवगत करा सकता हूं। आप केवल सामने टंगे आइने में अपनी शक्ल जाकर देख लें। जिस पर वहां ठहारा गूंज उठा और मुखर्जी साहब तुरंत वहां से चले गये।मुंशी प्रेम नारायण की खास आदत थी कि रात के किसी कार्यक्रम में जब वह जाते थे तो डिनर के समय पूछ लेते थे देख कर आओ क्या-क्या टेबिल पर खाने को लगा है। जब मैं बताता था तो वह कहते मेरे लिए एक प्लेट में उपरोक्त आइटम लगाकर ले आओ। उस समय वरिष्ठ पत्रकारों ने यू पी जर्नलिस्ट एसोसिएशन ;उपजाद्ध बरेली का भी गठन कर लिया जिसमें मुझे भी सदस्य बनाया गया। इसके बाद मुंशी प्रेम नारायण, जे. बी. सुमन, राकेश कोहरवाल, सुरेश शर्मा, रामदयाल जी, बलवंत मिगलानी, ब्रजपाल बिसरिया, के. के. शर्मा, दिनेश पवन आदि ने वर्ष 1975 में ‘उपजा’ का 10 वां प्रांतीय सम्मेलन बरेली में कराने का वीणा उठाया जो बरेली कालेज में हुआ। उपजा के इस प्रदेश सम्मेलन में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी थे। इस कमेटी के अध्यक्ष मुंशी प्रेम नारायण थे। उपजा के इस प्रदेश सम्मेलन में प्रदेश भर के 300 पत्रकारों ने भाग लिया और सम्मेलन कराने में अमर उजाला के मुरारी लाल माहेश्वरी एवं जिलाधिकारी माता प्रसाद जी ने काफी मदद दी। मुंशी प्रेम नारायण ने तब बरेली में ‘उपजा प्रेस क्लब’ एवं ‘प्रेस कालोनी’ बनाने की मुख्यमंत्री जी को ‘उपजा’ के सभी पत्रकारों की तरफ से ज्ञापन दिया गया। जिस पर बाद में भी उपजा की ओर से महामंत्री होने के नाते मैंने (निर्भय सक्सेना) भी कई बार स्मरण पत्र सरकार एवं जिला प्रशासन को दिये। जिस पर बरेली में नावल्टी चौराहे पर सिंघल लाइव्रेरी के एक हिस्से में यू पी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के कार्यालय एवम ‘उपजा प्रेस क्लब’ और एकता नगर में 18 मकानों की पत्रकार कालोनी प्रियदर्शिनी नगर में ‘उपजा’ के कारण मूर्त रूप ले सकी। ‘उपजा’ के पास जब जगह नहीं थी तब मेरे एवं अन्य सदस्यों के घरों पर उपजा के‘ प्रेस से मिलिये’ कार्यक्रम होते थे। बाद में जिला परिषद में वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर का भी ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम रखा गया। मुंशी जी के सहायक के रूप में भैरव दत्त भट्ट ‘दैनिक उत्तर उजाला’ के प्रतिनिधि बन गये। भट्ट जी भी मुंशी जी के घर पर रहते थे। मुंशी प्रेम नारायण के घर पर रविवार को शाम के समय अक्सर चाय का दौर चलता था जहां भाभी विद्यावती जी चाय के साथ घर की बनी नमकीन व मठरी का नाश्ता कराती थी। 15 दिसंबर 1985 को मेरी शादी हुई तो मैंने मुंशी जी को कार्ड दिया कि आपको जरूर आना है। मुंशी प्रेम नारायण जी साहूकारा धर्मशाला में बारात आने से पहले ही पहुंच गये थे एवं भोजन कर वहां से चले भी गये थे। कुछ दिन बाद मैंने शिकायत की कि आप शादी में नहीं आये तो उन्होंने तपाक से कहा जब तुम्हारी बारात रास्ते में थी तो हम लोग साहूकारा वाली धर्मशाला में पहुंच गये थे। सबसे पहले भोजन करने वालों में हम थे। जिसकी पुष्टि हमारे ससुराल पक्ष के लोगों ने भी कि एक मोटे से व्यक्ति आये थे और सबसे पहले खाना खाकर चले गये थे। कुछ अस्वस्थ होने पर मुंशी जी दिल्ली में अपनी बेटी के पास रहने लगे थे। मुझे फोन नंबर दे गये थे कि जब भी तुम दिल्ली आओ तो मेरी बेटी के देवनगर, दिल्ली स्थित आवास पर पत्नी को लेकर जरूर आना। मैं पत्नी को लेकर उनके देवनगर दिल्ली वाले घर पर भी गया। जहां उन्होंने मुझे बगैर भोजन के नहीं आने दिया। मुंशी प्रेम नारायण जी की शिक्षा इलाहाबाद में हुई जहां उन्होंने कानून की डिग्री ली। उनके पिता मुंशी लेखराज भी उर्दू संस्कृत के विद्वान थे। साथ ही वकालत भी करते थे।इसी कारण मुंशी जी ने वकालत शुरू कर दी। मस्तमौला स्वभाव एवं पत्रकारिता में रूचि होने के कारण कचहरी रोज जाया करते थे और मुकदमें उन पर सीमित ही आया करते थे। उ.प्र. सरकार में मंत्री रहे राम सिंह खन्ना के वे बहुत प्रिय थे। एक बार राम सिंह खन्ना के चुनाव के दौरान किसी ने उन्हें शराब का न्यौता दिया तो वह तपाक से बोले हम इतनी पी चुके हैं कि अब मन ही नहीं करता। जबकि वह शराब से दूर ही रहते थे। वर्ष 1950 के दशक में बरेली में ‘डेकोटा प्लेन’ आए थे तो किसी ने मुंशी प्रेम नारायण जी से कहा कि आप भी आठ आने के टिकट में हवाई यात्रा कर लीजिये तो वह हंसकर बोले हम हैं कौम के कायस्थ चार आने की दारू में पूरी रात उड़ेगे यह तो आठ आने में 10 मिनट में हवाई जहाज की ही उड़ान करायेगा। मुंशी जी के अनेक रोचक किस्से हैं जो हर किसी को हंसने पर मजबूर कर देते थे। ऐसी हसौड़ प्रवृत्ति के मुंशी प्रेम नारायण का निधन 3 सिंतबर 1990 को हुआ। बरेली में कार्यरत रहे अब स्वर्गीय हो गए पत्रकारों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।
स्वर्गीय धर्मपाल गुप्ता ‘शलभ’ धर्मपाल गुप्ता बरेली में नवभारत टाइम्स के संवाददाता थे। उन्होंने ‘अमर उजाला’ में ‘समय की धारा’ नामक कालम कुछ समय तक लिखा जब मैं ‘दैनिक विश्व मानव’ में था तो दोपहर में अक्सर पटेल चौक पर ‘फाइन प्रेस’ वाली दुकान पर जाता रहता था जहां उनके पिता चिरंजीव लाल गुप्ता, जो स्वयं ‘दैनिक वीर अर्जुन’ के संवाददाता थे, उनसे भी भेंट होती थी। धर्मपाल गुप्ता हमारे निवास के पड़ौस में ही जकाती मौहल्ले में रहा करते थे और साईकिल से अक्सर मेरे पिताजी सुरेश चन्द्र के पास आते जाते थे। इसी कारण वह मुझे भी पहचानते थे जब मैंने उन्हें बताया कि मैं भी ‘दैनिक विश्व मानव’ में पत्रकारिता का कार्य सीखने लगा हूं तो उन्होंने कहा कि तुम्हें पत्रकारिता में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी साथ ही अन्य समाचार पत्र पढ़ने पर भी ध्यान देना होगा। धर्मपाल गुप्ता की उर्दू भाषा पर भी मजबूत पकड़ थी अक्सर मुस्लिम समाज की प्रेस कांर्फेंस में वह मौलानाओं को निरूतर कर देते थे जब मैं ‘दैनिक जागरण’ आगरा में पहुंचा तो उन्होंने बताया कि उनके दामाद ब्रजेश कुमार आगरा स्टेडियम में वालीवाल के कोच हैं जो अक्सर मुझसे मिलने दैनिक जागरण कार्यालय आते थे।उनकी पुत्री शोभना जी से भी आगरा के बाद बरेली के ‘मानव सेवा क्लब’ के कई कार्यक्रमों में भेंट होती रही।
स्वर्गीय रामदयाल भार्गव आलमगिरी गंज क्षेत्र में ‘प्रभात प्रेस’ के मालिक थे। वह वहीं से साप्ताहिक अखबार भी निकाला करते थे। बाद में वह ‘हिंदुस्तान समाचार न्यूज एजेंसी’ के बरेली के प्रतिनिधि हो गये। कुछ समय वह ‘दैनिक विश्व मानव’ में बैठने लगे। ‘उपजा’ से भी उनका जुड़ाव रहा। उपजा के आई. वी. आर. आई. में प्रदेश सम्मेलन के बाद उन्होंने आर्थिक आरोपों से घिरकर ‘उपजा’ ने उन्हें अलग कर दिया। बाद में वह में अपनी गलती मानते हुए पुनः ‘उपजा’ में आ गये और उपजा बरेली के अध्यक्ष भी बनें। दैनिक विश्व मानव को प्रवीन सिंह एरन ने भी कुछ वर्ष चलाया। स्वर्गीय जे बी सुमन ने वर्ष 1976 में दैनिक दिव्य प्रकाश शुरू किया।जिसमे कई पत्रकार बने। उनके निधन के बाद उनके पुत्र प्रशांत सुमन ने संपादक के रूप में कार्य संभाला। प्रशांत सुमन का कोविड से 5 मई 2021को निधन हो गया। स्वर्गीय नरेंद्र मोहन मुकर्जी बरेली में पी टी आई के संवाददाता थे। अखिलेश सक्सेना ने हिंदुस्तान टाइम्स के लिए कार्य किया। बाद में अनिल माहेश्वरी हिंदुस्तान टाइम्स के बरेली में विशेष संवाददाता रहे। बरेली निवासी नरेश वर्मा नेशनल हेराल्ड, दिल्ली में कार्य करने के बाद बरेली में टाइम्स ऑफ इंडिया में आ गए थे। स्वर्गीय जगन्नाथ साहनी ने बरेली से उर्दू का हुब्बे बतन पेपर निकाला। बलवंत राय मिगलानी, अरुण मिगलानी उर्दू मिलाप के प्रतिनिधि रहे।
स्वर्गीय ज्ञान सागर वर्मा बरेेली के एक विद्वान पत्रकार रहे। लखनऊ के ‘दैनिक तरूण भारत’ एवं ‘दैनिक स्वतंत्र भारत’ में काम करने के बाद जब बरेली में ‘दैनिक विश्व मानव’ खुला तो वह बरेली में आ गये। अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में उन्हें महारत हासिल थी पर उनका राइटिंग अपठनीय होता था। आपातकाल के दौरान जब जनसंघ के नेता सत्यप्रकाश अग्रवाल गिरफ्तार हुए तो उनका समाचार वर्मा जी ने देर रात इतना घसीट राइटिंग में लिखा कि कार्यालय में बैठने वाला गुप्तचर अधिकारी उसको नहीं पढ़ सके और उस पर पास की मोहर भी लगा दी। जब सुबह समाचार छपा तो उसपर काफी हंगामा मचा कि यह समाचार ‘दैनिक विश्व मानव’ में क्यों छपा? जब उनको बताया कि कापी पर आपके गुप्तचर अधिकारी ने पास की मुहर लगाई है तभी यह समाचार छपा है। जिसको लेकर उस अधिकारी को हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया। समाचार देने पर और ज्यादा सख्ती हो गई। ज्ञानसागर वर्मा ‘उपजा’ से भी जुड़े रहे और उन्होंने आगरा, लखनऊ, दिल्ली आदि के कई उपजा सम्मेलनों एवं बैठकों में भाग लिया। उनकी 23 दिसंबर 2012 को मृत्यु हुई। चंद्र नारायण सक्सेना एडवोकेट उर्फ भ्राता जी ने भी लंबे समय तक दैनिक विश्व मानव की संपादकीय का ज्ञानेंद्र राही, अनुराग दीपक, संजय सक्सेना, रामा बल्लभ शर्मा भी विश्व मानव से जुड़े रहे। के सी सक्सेना भी प्रबंधक रहे।
स्वर्गीय दिनेश चन्द्र शर्मा उर्फ दिनेश पवन ने भी बरेली में लंबे समय पत्रकारिता की जिसमें ‘दैनिक विश्व मानव’, ‘दैनिक दिव्य प्रकाश’, ‘ दैनिक जागरण’, ‘दैनिक दो टूक’ में वह समाचार संपादक रहे। चौबे जी की गली निवासी पंडित श्रीकृष्ण शर्मा के पुत्र दिनेश पवन जी का जन्म बरेली में 4 अक्टूबर 1952 को हुआ तथा उनकी शिक्षा भी तिलक इंटर कालेज एवं बरेली कालेज में हुई। अपने पड़ौसी अनुराग दीपक के साथ ही वह पत्रकारिता क्षेत्र में आये और ‘दैनिक जागरण’ में लंबी पारी खेलकर वही से रिटायर हुये। दैनिक जागरण में धर्म कर्म एवं शिक्षा, भाजपा की बीट को भी लंबे समय तक देखा जिसपर उनकी मजबूत पकड़ थी। लंबे समय तक उनके धर्म पर लिखे आलेख समाचार /पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे। श्री दिनेश पवन की ज्योतिष पर भी अच्छी जानकारी है साथ ही नाटकों में रुचि के कारण ‘वीर हकीकत राय’ में विष्णु भगवान एवं पी.सी.आजाद जी के नाटक ‘गर्वनर राज’ में भी पुलिस कप्तान का भी अभिनय किया। श्री दिनेश पवन जी का कहना है कि वह नाटककार स्व. स्वराज्य पल्तानी चाचा के कारण ही अभिनय क्षेत्र में आये। श्री दिनेश पवन जी रिपोर्टिंग पर आज तक किसी ने उंगली नहीं उठाई। ‘दैनिक जागरण’ से सेवा निवृत्ति के बाद में वह दैनिक दो टूक के समाचार संपादक बनाये गये। उनका भी 2021 में ही निधन हो गया।
स्वर्गीय नरेश बहादुर ने भी बरेली से ‘रुहेलखण्ड टाइम्स’ अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार निकाला 2 अप्रैल 1938 को बुकिंग क्लर्क रहे राज बहादुर एवं श्रीमती त्रिवेणी जी के पुत्र श्री नरेश वर्मा की पढ़ाई कुंवर दया शंकर इंटर कालेज बरेली एवं बाद में बरेली कालेज से स्नातक एवं आगरा यूनिर्वसिटी से एमएसडब्ल्यू किया। वर्ष 1972 में बरेली में उस समय अंग्रेजी साप्ताहिक निकालना भी एक जटिल कार्य था पर श्री नरेश बहादुर जी ने ‘साप्ताहिक रुहेलखण्ड टाइम्स’ का प्रारंभ किया। बरेली में जब ‘दैनिक विश्व मानव’ शुरू हुआ तो उसमें वह प्रसार प्रबंधक बनाये गये। बाद में बरेली से उन्होंने बरेली से उन्होंने ‘पुलिस जर्नल’ का प्रकाशन किया। त्रिवटीनाथ मंदिर के सामने पावर हाउस के बरावर में रहने वाले नरेश जी का विवाह उमा जौहरी के साथ हुआ। श्री नरेश वर्मा यू. पी. जर्नलिस्ट एसोसियेशन एवं उपजा एवं नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट इंडिया के अध्यक्ष रहे पीयूष कांति राय के भी साथ भी स्कूली पढ़ाई की क्योंकि दोनों के पिता रेलवे में एक साथ ही सोरों ;कासगंजद्ध में कार्यरत थे। उनका भी 2021में निधन हो गया।
स्वर्गीय ब्रजपाल सिंह बिसरिया ने भी गली मिर्धान से अपनी प्रेस से हिंदी साप्ताहिक ‘युग संदेश’ निकाला। बरेली कालेज से स्नातकोत्तर रहे श्री ब्रजपाल बिसारिया जी की गिनती बरेली में गिनती एक अच्छे पत्रकार के रूप में होती थी। श्री बिसारिया जी उपजा के कर्मठ सदस्य रहे और आगरा सहित कई जिलों में उपजा सम्मेलनों में प्रतिभाग किया।
स्वर्गीय जगदीश विकट ने मढ़ीनाथ में रहकर अपना साप्ताहिक अखबार ‘चित्रांकन’ कई वर्षों तक निकाला। वह एक तेज तर्रार पत्रकार रहे तथा उन्हें एक जुझारू पत्रकार के रूप में बरेली के लोग जानते रहे। उन्होंने कई चुनाव भी लड़े।
स्वर्गीय बच्चन सिंह ने भी बनारस से बरेली आकर ‘दैनिक जागरण’ में समाचार संपादक के रूप में लंबी पारी खेली। उन्होंने संपादकीय विभाग को लेखन में कई तरह से छूट भी दी। साथ ही वह ‘दैनिक जागरण’ के लिए अपना साप्ताहिक कालम नियमित लिखते थे। ‘दैनिक जागरण’ के बाद बरेली में उन्होंने ‘संवाद केसरी’ में संपादक के रूप में कार्य किया। बरेली में उन्होंने पत्रकारिता को एक अलग पहचान दिलायी। वह बरेली के समाज के कई वर्गों में लोकप्रिय रहे तथा लोग उन्हें अपने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाते थे।
स्वर्गीय पंकज शुक्ला इलाहाबाद से अपने पिता श्री अखिलेश शुक्ला जी के साथ बरेली आये। बरेली में उनके पिता अखिलेश जी ‘दैनिक जागरण’ में रिपोर्टिंग करते थे। अखिलेश जी के ‘दैनिक जागरण’ छोड़ने के बाद पंकज शुक्ला ने ‘दैनिक जागरण’ में अपनी रिपोर्टिंग प्रारंभ की। श्री पंकज शुक्ला एक तेज-तर्रार रिपोर्टर रहे प्रशासन के बाद उन्होंने विकास भवन जैसी वीटों पर भी बेहतर रिपोर्टिंग कर अपने हुनर का परिचय दिया। कुछ समय बाद दिल्ली के एक न्यूज चैनल में कार्य करने लगे पर उनका मन वहां नहीं लगा और उन्होंने वहां देहरादून का ‘दैनिक राजसत्ता’ को खरीद कर दिल्ली से राजसत्ता नामक पोर्टल का संचालन किया। पिछले दिनों उनकी हृदय रोग से दुखद मृत्यु हो गई। उपजा प्रेस क्लब बरेली ने उनके नाम पर एक कोष का भी संचालन प्रारंभ किया है जिससे नगर के एक बेहतर रिपोर्टर को पुरस्कृत करने की भी योजना है।
स्वर्गीय सुगोद नाथ त्रिपाठी ‘दैनिक नवसत्यम’ के बाद दैनिक जागरण से जुड़ गये और विभिन्न समाचार डेस्कों पर काम करने के बाद ‘दैनिक जागरण’ से ही सेवानिवृत्त हुए। मिलनसार रहे त्रिपाठी का कुछ समय पूर्व 2019 में ही उनका निधन हुआ। स्वर्गीय राजीव सक्सेना लखनऊ के ‘दैनिक जागरण’ से स्थातंरित होकर बरेली ‘दैनिक जागरण’ आये श्री राजीव सक्सेना ने लंबे समय तक दैनिक जागरण में खेल पेज का संपादन किया। इसके बाद वह ‘दैनिक अमर उजाला’ में चले गये। अमर उजाला छोड़ने के बाद वह बरेली में ‘केनविज टाइम्स’ में भी रहे। वर्ष 2021 में उनका निधन हो गया।
स्वर्गीय आशीष अग्रवाल ने दैनिक ‘दैनिक अमर उजाला’ बरेली में लंबे समय तक संपादकीय विभाग की विभिन्न डेस्कों पर लंबी पारी खेली। आशीष अग्रवाल अमर उजाला के एक मजबूत स्तंभ रहे। उनकी बेहतर रिपोर्टिंग हमेशा चर्चा में रही। बाद में आशीष अग्रवाल ‘दैनिक जागरण’ आ गये। बरेली ‘दैनिक जागरण’ में भी वह सिटी इंचार्ज रहे। इसके बाद वह दिल्ली चले गये और वहां से एक पाक्षिक पत्रिका भी निकाली। वर्तमान मे आशीष अग्रवाल ‘प्रसार भारती’ से जुड़े हुए थे। श्री आशीष अग्रवाल श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के भी बरेली में सर्वेसर्वा रहे। 20 अप्रैल 2021 को उनकी मृत्यु हो गई
रस्तोगी जी भी अमर उजाला में रहे।
स्वर्गीय सुधीर सक्सेना ने लंबे समय तक ‘दैनिक अमर उजाला’ में कार्य किया बाद में वह ‘दैनिक जागरण’ में आ गये। वह बिक्रीकर विभाग में भी कार्यरत थे। एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया था।
स्वर्गीय रामा बल्लभ शर्मा कुंवर दया शंकर इंटर कालेज के छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। बरेली कालेज से कानूनी शिक्षा के बाद जिला बार एसोसियेशन के सचिव भी रहे। श्री रामा बल्लभ लंबे समय तक ‘दैनिक अमर उजाला’ में अदालतों की रिपोर्टिंग का कार्य भी करते रहे। इसके बाद वह ‘दैनिक दिव्य प्रकाश’ में आये। श्री रामा बल्लभ ने बरेली में ‘दैनिक जागरण’ के लिए विधि रिपोर्टिंग का कार्य भी किया। इनका 30 अप्रैल 2021 को निधन हो गया।
स्वर्गीय उदित साहू ने ‘दैनिक अमर उजाला’ में लंबे समय तक संपादकीय प्रभारी के रूप में कार्य किया। आगरा निवारी श्री उदित साहू बरेली में अपनी विचारधारा के चलते कई संगठनों से भी जुड़े रहे। ‘दैनिक अमर उजाला’ से रिटायरमेंट के बाद वह आगरा चले गये जहां कुछ-कुछ वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया।
स्वर्गीय वीरेन डंगवाल ने जार्ज फर्नाडीज के अखबार के ‘प्रतिपक्ष’ के बरेली प्रतिनिधि रहे। श्री वीरेन डंगवाल ने बरेली कालेज में अध्यापन का कार्य भी किया। बाद में वह लंबे समय तक ‘दैनिक अमर उजाला’ के संपादकीय प्रभारी भी रहे। कुछ समय पूर्व ही उनका निधन हो गया।
स्वर्गीय श्रीभगवान सुजानपुरिया ‘दैनिक अमर उजाला’ के संपादकीय विभाग में आगरा से आये थे। बाद में उन्होंने ‘दैनिक विश्व मानव’ में भी कार्य किया। जब दिल्ली में ‘दैनिक जनसत्ता’ शुरू हुआ तो वह उसके संपादकीय विभाग में चले गये। दिल्ली में ही उनकी मृत्यु हुई।
स्वर्गीय सुनील शाह दैनिक ‘दैनिक अमर उजाला’ में रहे। जब दिल्ली में ‘दैनिक जनसत्ता’ शुरू हुआ तो वह संपादकीय विभाग की टीम में शामिल हो गये। बाद में वह पुनः ‘दैनिक अमर उजाला’ में लौट आये और ‘दैनिक अमर उजाला’ के संपादकीय प्रभारी बने। उनकी अल्पकाल में मृत्यु हो गई।


स्वर्गीय शिव कुमार अग्रवाल ने लंबे समय तक ‘दैनिक अमर उजाला’ के कारोबार पृष्ठ से जुड़े रहे। वह बरेली के बाजार भाव ‘दैनिक अमर उजाला’ को उपलब्ध कराते थे। साथ ही विभिन्न विषयों पर अपनी रिपोर्टिंग भी ‘दैनिक अमर उजाला’ को भेजते थे। बाद में वह ‘दैनिक जागरण’ से जुड़ गये। व्यापारी नेता के साथ ही वह कई संगठनों से जुड़े लोकप्रिय व्यक्ति थे। 11 सितम्बर 2017 को उनका निधन हुआ।
स्वर्गीय जितेन्द्र भारद्वाज मुजफ्फरनगर से बरेली आये और ‘दैनिक विश्व मानव’ में संपादकीय प्रभारी रहे। उनकी समाचारों पर पैनी पकड़ थी। बाद में वह दिल्ली चले गये और कृषि जगत अखबार से जुड़ गये जहां उन्होंने कई वर्षों तक कार्य किया।
स्वर्गीय रामगोपाल शर्मा बरेली में ‘दैनिक विश्व मानव’ के संपादक रहे। श्री रामगोपाल शर्मा लंबे समय तक ‘आकाशवाणी’ के बरेली प्रतिनिधि भी रहे। मिलनसार श्री शर्मा नगर में काफी सामाजिक व्यक्ति रहे। कुछ साल पहले उनका निधन हुआ।
स्वर्गीय सतीश कमल ‘दैनिक विश्व मानव’ में काफी समय तक जुड़े रहे। बाद में वह वकालत पेशे में चले गये। श्री सतीश कमल कायस्थ सभा में भी काफी सक्रिय रहे।
स्वर्गीय सरदार कमल जीत सिंह ने दैनिक जनमोर्चा बरेली से शुरू किया। स्वर्गीय ए बी नूतन ने भी नूतन कहानियों के लिए बरेली से सत्य कथा लेखन किया।
स्वर्गीय अमिताभ सक्सेना ‘दैनिक अमर उजाला’ से जुड़े रहे। किशन सरोज के पुत्र श्री अमिताभ ‘अमर उजाला’ में रिपोर्टिंग का कार्य करते थे उनकी अल्पआयु में ही मृत्यु हो गई।
अमिताभ मिश्रा के पिता स्वर्गीय अखिलेश मिश्रा भी ‘दैनिक स्वतंत्र भारत’ लखनऊ में कार्यरत रहे और उपजा संगठन से भी जुड़े रहे।
स्वर्गीय मो. युसूफ दैनिक विश्व मानव में कार्यरत रहे और इनका 23 मई 2021 को निधन हो गया।

निर्भय सक्सेना

By Anurag

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