फ़िल्म कलाकार शशि कपूर अपने बाल्यकाल में बरेली में उस समय गुस्से में आ गए और पृथ्वी थिएटर की टीम पर हमला करने वाले बरेली कॉलेज के कुछ कथित छात्रों को हिन्द सिनेमा के पास हाथ में चेन लेकर खदेड़ दिया और कुछ को तब के गुल्लू होटल के पास के नाले में धकेल भी दिया। उनके पिता राज्य सभा सदस्य पृथ्वी राज कपूर ने कोतवाली पुलिस बुलाकर कुछ लोगो की गिरफ्तारी भी करा दी।     

        हिन्द सिनेमा का संचालन करने बाले स्वर्गीय प्राण नाथ कपूर के भाई नरेंद्र नाथ कपूर बताते हैं कि वर्ष 1953 – 1954 की गर्मियों में पृथ्वी थिएटर हिन्द सिनेमा में अपने नाट्यदल के साथ नाटक खेलने आया था जिसने यहां पठान, दीवार, दहेज  के साथ ही कई नाटक मंचित किए जिसमे एक दिन के लिए राज कपूर और नरगिस भी बरेली आई थीं।

उसमें पृथ्वी राज कपूर, शशि कपूर, रविंदर कपूर आदि भी आये थे। जिन्हें हिन्द सिनेमा के साथ ही पंडित मथुरा प्रसाद की कोठी में ठहराया गया था। यह दल एक सप्ताह तक बरेली में रुका था। उस समय नाटक का 2,  7 से 10 आने/ रुपये का टिकट था। इस को लेकर बरेली कॉलेज एवम कालीबाड़ी  के कुछ छात्रों ने हिन्द सिनेमा पर कनशेसन को लेकर हंगामा किया और कलाकारों के साथ बदतमीजी भी की। जिस पर उस समय युवा अवस्था वाले शशि कपूर ने उन लोगो को समझाने का प्रयास भी किया। पर कुछ लोगो के तोड़ फोड़ करने पर वह भी हिन्द सिनेमा कर्मियों के साथ हमलावर पर टूट पड़े और हाथ मे उन हमलावरों की चेन छीन कर उन्हें खदेड़ दिया। कुछ हमलावर लोगो को गुल्लू होटल के पास वाले नाले में भी धकेल दिया। इसी बीच कोतवाली पुलिस को कुछ पकड़े हमलावर लोगो को सौप दिया गया।  बाद में मशहूर फिल्मी कलाकार और राज्यसभा सदस्य पृथ्वी राज कपूर जी ने माफी मांगने पर उन लोगो को पुलिस से छुड़वा भी दिया था।                     इस संबंध में बरेली इंटर कॉलेज के मैनेजर जे एन सक्सेना पुत्र चंद्र नारायण सक्सेना अपनी स्मृति से बताते हैं कि वह भी हिन्द सिनेमा में  पृथ्वी राज कपूर का पठान नाटक देखने अपने मित्र गिरीश के साथ गए थे। अगले दिन जब वह मथुरा प्रसाद की कोठी पर गिरीश के साथ गए तो एक नोजवान तख्त पर बैठ कर स्नान कर रहा था। गिरीश कपूर ने बताया कि यही पृथ्वी राज कपूर के पुत्र शशि कपूर हैं। वही शशि कपूर से मेरी भेंट हुई थी। बाद में वह ब्लू पिलाई माउथ कार से अपने पिता पृथ्वी राज कपूर के साथ राजा पीलीभीत के यहां दोपहर भोजन के लिए चले गए थे।                                इस संबंध में हिन्द सिनेमा के मालिक रहे नरेंद नाथ कपूर , जिन्होने  जितेन्द्र एवम सुलक्षणा पंडित के साथ मददगार और आदित्य पंचोली के साथ गमन फ़िल्म का निर्माण भी किया था, बताते हैं की उनके दादा केशव राम कपूर अपने पुत्र प्रेम नाथ कपूर के साथ निस्बत लाहौर से रिफ्यूजी के रूप में अमृतसर के बाद लखनऊ आए थे। उनके पिताजी प्रेम नाथ कपूर ने भी हातिमताई जैसी 20 फिल्में भी लाहौर में बनाई थी। वह पृथ्वी राज कपूर के मित्र थे। बरेली में रोडवेज के महाप्रबंधक रहे उनके रिश्तेदार रोशन लाल के कहने पर  प्रेम नाथ कपूर अपने पुत्र प्राण नाथ, नरेंद्र नाथ कपूर  के साथ बरेली आ गए।

बरेली में इब्राहिम स्टेट में उस समय हिन्द सिनेमा भवन बन रहा था पर उसको सिनेमा हाल की परमीशन नही मिली थी जिस पर मुख्यमंत्री जी ने प्रेमनाथ कपूर के परिवार को रिफ्यूजी कोटे से विशेष परमिशन सिनेमा हाल की दिलवाई थी। जिसमे दिल्लगी एवम दुलारी फ़िल्म चलीं। पर कुछ अपरिहार्य कारण से हिन्द सिनेमा बन्द हो गया। जिसकी बाद में 1954 में मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने  हिन्द सिनेमा की रिओपनिंग कराई तब यहॉ आवारा फ़िल्म लगी थी। लोक सभा सांसद रहे राममूर्ति जी भी हिन्द सिनेमा का वर्ष 1954 में उद्घाटन  में शामिल हुए थे। हिन्द सिनेमा के पीछे का मार्ग आज भी प्रेम नाथ कपूर मार्ग के नाम से जाना जाता है जिसका वहां पत्थर भी लगा है। नरेंद्र नाथ कपूर ने अपने बड़े भाई प्राण नाथ कपूर की स्मृति में बरेली में प्राण नाथ कपूर मेमोरियल आल इंडिया हॉकी टूर्नामेंट भी बरेली कॉलेज में कराया। जिसमे देश की नामी हॉकी खिलाड़ी अपनी टीम के साथ आये।                      

   निर्भय सक्सेना

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