बरेली में टिकट का एक दावेदार ऐसा भी है जो एक नई मिसाल कायम कर रहा है। हर दिल अजीज और खुशमिजाज डा. अनीस बेग इन दिनों अपने इसी समर्पण के लिए चर्चा में हैं। समाजवादी चिकित्‍सा प्रकोष्‍ठ के अध्यक्ष डा. अनीस बेग ने वैसे तो बरेली शहर और कैंट दोनों विधानसभा सीटों से टिकट के लिए दावेदारी की थी। पैनल में उनका नाम टॉप पर भी पहुंच गया था लेकिन अप्रत्‍याशित बदलाव ने उन्‍हें टिकट से वंचित कर दिया। पार्टी ने उनके भाई सुल्‍तान बेग को मीरगंज से टिकट दे दिया और राजेश अग्रवाल को शहर विधानसभा सीट से उम्‍मीदवार बनाया। अनीस बेग चाहते तो कुछ अन्य दावेदारों की तरह अंदरखाने राजेश अग्रवाल का विरोध कर पार्टी को अपनी ताकत का अहसास करा सकते थे लेकिन अपनी पूरी टीम के साथ राजेश अग्रवाल का मंच साझा करके अनीस बेग ने एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।

सियासत के क्षेत्र में भी उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है डा. अनीस बेग वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। तब से लेकर अब तक वह लगातार शहर विधानसभा क्षेत्र के साथ ही कैंट क्षेत्र में भी पूरी तरह सक्रिय हैं। अपने सादगीपूर्ण व्‍यवहार के चलते लोग उन्‍हें बेहद पसंद भी करते हैं। विधानसभा के टिकट के दावेदार अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे थे। उस वक्‍त बड़ी तादाद में हिन्‍दू और सिख समाज अनीस बेग के समर्थन में सड़कों पर उतर आया था। अनीस बेग ने पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाने में दिन-रात एक कर दिया था। उनका समर्पण भाव पार्टी की जीत के लिए आज भी उतना ही है जितना कि पहले था। अनीस बेग पर इस वक्‍त दोहरी जिम्‍मेदारी है। पहली अपने भाई सुल्‍तान बेग को मीरगंज विधानसभा सीट जिताने की तो दूसरी शहर के प्रत्‍याशियों को पार्टी की मजबूत स्‍थिति का एहसास कराने की। दोनों ही जिम्‍मेदारियां वह बाखूबी निभा रहे हैं। मीरगंज में भी वह चुनाव प्रचार को पूरी तत्‍परता से अंजाम दे रहे हैं तो शहर विधानसभा सीट पर पार्टी प्रत्‍याशी राजेश अग्रवाल के लिए जनसंपर्क अभियान का हिस्‍सा बनकर उन्‍हें मजबूती भी प्रदान कर रहे हैं। टिकट की लड़ाई में भले ही वह हार गए हों लेकिन व्‍यक्तित्‍व की जंग उन्‍होंने जीत ली है।



By Anurag

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