रोटरी क्लब बरेली के द्वारा राजद्रोह क़ानून पर परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता पूर्व शासकीय अधिवक्ता फ़ौजदारी राजेश यादव तथा अधिवक्ता सुधांशु शर्मा ने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले लोकतांत्रिक देश में क़ानून के राज के लिये राजद्रोह क़ानून आवश्यक है जिससे देश की संप्रभुता के खिलाफ बोलने या कुछ करने वाले को क़ानून का भय रहे।
गत दिनों उच्चतम न्यायालय ने इस क़ानून के प्रयोग पर रोक लगाते हुए सरकार से इस क़ानून में बदलाव पर विचार करने के लिये कहा था। सभा का शुभारंभ अध्यक्ष मोहन गुप्ता, सचिव पंकज श्रीवास्तव, मुख्य वक्ता राजेश यादव, सुधांशु शर्मा तथा पूर्व अध्यक्ष राजेन् विद्यार्थी के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया । अध्यक्ष मोहन गुप्ता ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि आज यह आवश्यक है कि हम इस क़ानून पर चर्चा करें । सुधांशु शर्मा ने बताया कि यह क़ानून वर्ष १८७० में अग्रेंजो द्वारा स्वतंत्रता आन्दोलन को दबाने के लिए लागू किया था और महात्मा गाँधी, बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर आदि को इस क़ानून में सजा दी गई थी । राजेश यादव जी ने बताया कि पिछले आठ साल में इस क़ानून में दर्ज किये गये मामलों में १६२% की वृद्धि हुई है जिस कारण उच्चतम न्यायालय तथा देश के वरिष्ठ न्याय विशेषज्ञों ने इस पर संज्ञान लिया और इस क़ानून के वर्तमान स्वरूप पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया । अतिथि वक्ताओं को स्मृति चिन्ह राज गोयल तथा अनुराग सक्सेना द्वारा दिये गये । मुख्य वक्ता का परिचय राजीव गुप्ता द्वारा दिया गया । धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए सीए राजेन् विद्यार्थी ने कहा कि भारत माता को डायन कहने वाले या देश के टुकड़े करने वाले बयान देने वालों के लिये यह क़ानून आवश्यक है दुरुपयोग रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किये जाने चाहिए । सभा में अरविंद भटनागर, के पी सिंह, गोविंद सक्सेना, मनीष गोयल, प्रधीर गुप्ता, ए पी गोयल, डी पी सिंह, विश्वनाथ गुप्ता, सुशील गोयल, विमल अवल , नितीश टंडन, अंजू गुप्ता, शालिनी विद्यार्थी, दिशी गुप्ता, कनिका शर्मा, सुधा गुप्ता, सोनी टंडन आदि उपस्थित रहे ।

By Anurag

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