अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्‍म भूमि पर राममंदिर के चल रहे नीव निर्माण की प्रगति को देश के 11 राज्यो के मुख्यमंत्री एवम देश के लगभग 100 नगरनिगम के महापौर को अयोध्या में रामलला के दर्शन करवा कर पूरे देश को यह संदेश दे दिया गया कि अगर मन मे आस्था और विकास का जनून है तो उसका मार्ग भी प्रभु राम निकाल ही देते हैं। अयोध्या ही नही काशी भी इसका जीवंत प्रमाण है। जिसे देख देश के विभिन्न राज्यो के मुख्यमंत्री और नगर निगम के मेयर भी गदगद हुए और विकास की अलख उनके दिल मे अंदर तक उत्तर गई । राम मंदिर का प्रथम चरण  आधार अब पूरी तरह तैयार हो गया है। कंक्रीट से मंदिर की नींव भराई विगत माह ही पूरी हो गई थी। अब पत्थर नक्काशी का कार्य भी गति पकड़ रहा है। रिटेनिंग वाल के लिए निरंतर कार्य चल रहा है। अयोध्या को अब विश्व पटल पर एक धार्मिक पर्यटन नगरी का रूप दिया गया है। इसे दिखाने के किए ही 11 राज्यो के मुख्यमंत्री  एवम मेयर अलग अलग तिथियों पर दिसम्बर में अयोध्या आये और रामलला के चरणों मे माथा टेका और उनका आशीर्वाद लिया। अयोध्या में मांझा बरहटा में 241 एकड़ भूमि में  251 फुट ऊंची भगवान राम की मूर्ति लगेगी जिसकी मुख्यमंत्री की देखरेख में कार्य प्रगति पर है।              

                   स्मरण रहे दीपावली 2021 पर इस बार अयोध्या में  पांचवे दीपोत्सव पर एक साथ सर्वाधिक 9 लाख 41 हजार 551 दीप प्रज्वलित होने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र भी मिल गया है। साथ ही भारतीय डाक विभाग ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवम मुख्यमंत्री योगी जी के हाथ से आवरण भी जारी कराया। अब अयोध्या में  विकास के नए कार्य चल रहे हैं।

अयोध्या में पांचवे दीपोत्सव पर छोटी दीपावली की शाम को दीपों की माला से रोशन अयोध्या धाम में एक साथ सर्वाधिक 9 लाख 41 हजार 551 दीप प्रज्वलित होने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारी  ड्रोन के साथ उपस्थित रहे । इसके बाद तेल के दीयों को एक साथ जलाने वाला आयोजन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्व विद्यालय को संयुक्त रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कर इसका प्रमाण पत्र भी जारी किया।

 सूत्रों के अनुसार राम की पैड़ी पर हजारों युवाओं ने 10 लाख 95 हजार 645 दीप सजाकर 9 लाख 41 हजार 551 दीप जलाने का रिकॉर्ड बनाया।                                      इस बार के अयोध्या में 5वें दीपोत्सव में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन को भी प्रतीकात्मक रूप में दिखाया गया था। शोभा यात्रा में 11 रथों वाली झांकी निकाली गई। भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचने का अनूठा दृश्य रहा। उसके बाद सभी स्वरूपों को हेलीपैड से रामकथा पार्क तक रथ से लाया गयाजहां भगवान राम का राज्याभिषेक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। पांचवे दीपोत्सव पर सरयू नदी का घाट दिए के प्रकाश से जगमग था।  राम की पैड़ी से जुड़े 32 घाट पर लगभग 9.51 लाख दिए जले। दिए से सजे रामायण कालीन दृश्यों को देखकर हर कोई प्रसन्न था। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में करीब सवा 3 लाख दिए घाट पर ज्यादा लगे थे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत बाहर से आए देश विदेश के अतिथियों ने अवध के युवाओं की नया विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए सराहना की।                           श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने भी रामलला के अस्थाई मंदिर समेत श्रीराम जन्मभूमि गर्भगृह समेत चल रहे राममंदिर निर्माण की नींव को ही 51 हजार दीपों से जगमगा दिया। लेजर लाइट एवम रंगोली से सजी रामजन्मभूमि की शोभा देखते ही बन रही थी।                                अयोध्या में 661 करोड़ की और परियोजनाओं का लोकार्पण एवम आरंभ भी किया था। आजकल भगवान राम सर्किट को बेहतर हवाई, नदी एवम सड़क मार्ग से जोड़ने की कई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है।  साथ ही देशभर के राम भक्तों ने भी अपने आराध्य रामलला के लिए अपना खजाना खोल दिया है। राम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला के सामने रखे दानपात्र में अब लगभग 30 लाख से 40 लाख का दान आना बताया गया है। यह दान कार्यालय और श्री रामजन्म भूमि ट्रस्ट के खातों से अलग, केवल विराजमान रामलला के सामने रखे दानपात्र में ही आया था।   श्री राम जन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट का अब 20 हजार वर्ग फुट में 2 मंजिला भवन भी बनेगा।                                       राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण कार्य का बीते दिनों पत्रकारों को भी अवलोकन कराया था। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर की नींव कंक्रीट में कर्नाटक का ग्रेनाइट एवम मिर्जापुर का सेंडस्टोन का प्रयोग किया गया है। एक ब्‍लॉक 16 घनफुट का है। 30 हजार ब्लॉक एक के ऊपर एक कर रखे जाने हैं।

न्यास के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर के गर्भगृह में दिसंबर 2023 तक रामलला के विराजमान करने की दिशा में कार्य जारी है। इस तीन मंजिल वाले भगवान राम मंदिर की डिजाइन के अनुसार गर्भ गृह में रामलला होंगे। दूसरे तल पर राम दरबार होगा। साढ़े छह एकड़ में मदिर का दक्षिण शैली में चौकोर परकोटा बनाया जाएगा। वर्ष  2023 के अंतिम माह तक भव्य राम मंदिर बनकर तैयार होना है। निर्माण की शुरुआत में यह बात आई थी कि यहां की मिट्टी अस्थिर है। इस वजह से मंदिर की नींव का निर्माण काफी मजबूती से किया। ट्रस्‍ट के सदस्‍यों ने कहा कि मंदिर का आधार लगभग तैयार हो गया। मिर्जापुर से लाए गए करीब चार लाख क्यूबिक फीट गुलाबी पत्थरों से चबूतरा बनाया जान है। नवनिर्मित चबूतरे पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। न्यास महासचिव चंपत राय ने फोन पर  बताया था कि राजस्थान से लाए गए 1 लाख वर्ग फुट उकेरे गये पत्थर यहां लगाये जाने के लिए तैयार हैं जो कार्यशाला में जा रहे हैं। उन पत्थरों पर अब  कोडिंग का कार्य हो रहा है। पिछले दिनों राममंदिर निर्माण के लिए नींव के डिजाइन में राफ्ट को लेकर आंशिक परिवर्तन किया गया था अब नींव 48 लेयर पर होगी। यही नहीं राफ्ट की मोटाई भी कम की गई है। पहले की डिजाइन के अनुसार, राफ्ट की मोटाई ढाई मीटर थी, जिसे घटाकर अब डेढ़ मीटर कर दी गई है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कार्यालय प्रभारी प्रकाश जी ने अपने कार्यालय में बताया राम मंदिर निर्माण कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। राफ्ट का निर्माण कार्य नवम्बर अंत तक तैयार होगा। विंध्यवासिनी धाम मिर्जापुर के लाल बलुआ पत्थरों से दिसंबर में प्लिंथ का निर्माण भी शुरू होने की आशा है।  जिला प्रशासन के अनुसार 22 करोड़ की लागत से अयोध्या के गुप्तार घाट को भी नया रूप मिलेगा। इसके साथ ही नदी के किनारे खाली पड़ी भूमि पर भगवान श्रीराम के नाम पर एक आध्यात्मिक पार्क भी बनाया जाएगा।                              भगवान रामलला के मंदिर के लिए देशभर के राम भक्तों ने रामलला के लिए खजाना खोल दिया है। मिली जानकारी के अनुसार पिछले सितंबर महीने में रामलला ने अकेले अपने दानपात्र से ही लगभग 60 लाख से 80 लाख रुपये का दान प्राप्त किया था । श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से चलाए गए निधि समर्पण अभियान में मार्च 2021तक हुए ऑडिट के अनुसार 3500 करोड़ रुपये का दान मिला । अब यह समर्पण धनराशि बढ़कर 5 हजार करोड़ की होना बताई जा रही है। हालांकि यह संख्या अभी अंतिम नहीं है। जिसमे बाद में उपरोक्त राशि में निरंतर बढ़त होती गई। ऐसा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने फ़ोन पर मुझे बताया।                               

 निर्भय सक्सेना, (वरिष्ठ पत्रकार)

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