बरेली। देश भर में आजादी का अमृत महोत्सव बहुत धूम धाम से मनाया गया। देश भर में तिरंगा यात्रा भी निकाली गईं। वर्ष 2022 में अब तक देश मे अब कोविड वेक्सिनेशन के लगभग 211करोड़ डोज देने के लिए जाना ही जायेगा जिससे लोगो को एक स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र मिला। वहीं काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, विक्रांत जैसा देश में निर्मित आधुनिक जहाज देश को समर्पित किया गया। अगर उत्तर प्रदेश या अपनी बरेली जिले की बात की जाए तो बरेली आज भी सरकारी मेडिकल कॉलेज, एम्स, सरकारी कृषि विश्व विद्यालय, बरेली में महानगर में सरकारी डिग्री कॉलेज से अभी तक वंचित ही है। कृषि वाहुलय बरेली मंडल में आई वी आर आई पर कई फॉर्म हैं,। राज्य सरकार का बिलवा फॉर्म भी भोजीपुरा में है। इसमें कृषि विश्व विद्यालय की अपार संभावना भी हैं। यहां का केंद्र सरकार के न्याय एवम अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से बना स्पाइनल इंजरी सेंटर भीबहल पड़ा है। यही नहीं बरेली कॉलेज तो एडेड कॉलेज ही है। इसकी भी प्रवेश की सीमित क्षमता ही है। अगर बरेली में राजकीय डिग्री कॉलेज खुल जाए तो छात्र का काफी भला होगा। बरेली का प्रसिद्ध काष्ट कला केंद्र भी सिमट ही गया। बरेली में केंद्र एवम प्रदेश की दूसरी बार भी बीजेपी की सरकार ही है। बरेली में भी सभी सांसद बीजेपी के ही हैं। बरेली में सात विधायक, एम एल सी, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, एवम प्रदेश सरकार में वन मंत्री भी बरेली के ही हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गंगा एक्सप्रेस वे का शाहजहांपुर में मोदी जी द्वारा शिलान्यास भी हुआ। अगर बरेली की बात की जाए तो अपने जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के त्रिशूल एयरपोर्ट पर कई बार चेंज ओवर तो हुए पर कोई नई योजना की घोषणा इस वर्ष में नहीँ हो सकी। अलवत्ता इस वर्ष हवाई मानचित्र पर बरेली का नाम जरूर आया और बरेली के आसपास के लोगो को एयर कनेक्टिविटी भी मिली। सेटेलाइट, इज्जतनगर का उपरिगामी पुल भी शुरू हुआ परंतु बरेली को पुरानी मांग के अनुरूप न तो सरकारी एम्स, कृषि विश्वविद्यालय या दक्षिण के लिए सीधी रेल सेवा मिली। चौपला को बदायूं रोड से जोड़ने वाले पुल का काम, रामगंगा पर बांध का अधूरा कार्य हो या कर्मचारी राज्य बीमा निगम का 100 विस्तर वाला हॉस्पिटल का समय सीमा में कार्य ही पूरा तो क्या अभी शुरू नही हो सका। सी बी गंज में प्रस्तावित आई टी पार्क, अर्बन हॉट, कुतुबखाना, सुभाषनगर, डेलापीर का उपरिगामी पुल पर भी केवल आश्वासन ही रहे। स्मार्ट सिटी बरेली में सड़के सीवर पाइप लाइन डालने के लिए हर तरफ खोदी गई। पर कार्य अभी भी अधूरा ही रहा। कूड़ा निस्तारण के लिए भी बाकरगंज में प्लांट शुरू होने का दावा केवल दावा ही रह गया। बरेली कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने को कॉलेज कर्मियों का आंदोलन भी चलता रहा। पत्रकार निर्भय सक्सेना ने वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महोदय को पत्र भी लिखा था जिसको राज्यपाल कार्यालय से ई 8002 /15 जी एस/2011/ मिस ( ।।।) 14 अगस्त 2015 को प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग अग्रसारित भी किया गया था जिसकी प्रति लिपि भी पुन भेजी गई। वह पत्र भी फाइल में ही कैद हो गया। बरेली में पार्षद सतीश कातिब, गौरव सक्सेना, शालिनी जौहरी आदि के प्रयास से निर्भय सक्सेना की प्रेरणा पर चित्रगुप्त चोक पर कलम दवात की प्रतिमा भी लगी जिसमे कायस्थ चेतना मंच के संरक्षक डॉ पवन सक्सेना, अध्यक्ष संजय सक्सेना, एडवोकेट अमित सक्सेना, अखिलेश सक्सेना, मुकेश सक्सेना का भी सहयोग मिला। अर्बन कोआपरेटिव बैंक में संतोष गंगवार जी ने दीन दयाल उपाध्याय जी की मूर्ति लगवाई। मानव सेवा क्लब अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा, सतेंद्र सक्सेना, अभय भटनागर, एन एल शर्मा, वेद प्रकाश कातिब, राजेन विद्यार्थी, निर्भय सक्सेना, इंदर देव त्रिवेदी आदि क्लब के सदस्यों के साथ समाजसेवा के कार्य मे लगा रहा।

निर्भय सक्सेना, पत्रकार

By Anurag

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